Tafsir — Hud 9

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Hud · Ayah 9 · Hud
وَلَئِنْ أَذَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ مِنَّا رَحْمَةً ثُمَّ نَزَعْنَـٰهَا مِنْهُ إِنَّهُۥ لَيَـُٔوسٌ كَفُورٌ
"And if Allāh should touch you with adversity, there is no remover of it except Him; and if He intends for you good, then there is no repeller of His bounty. He causes it to reach whom He wills of His servants. And He is the Forgiving, the Merciful." — Sahih International

मुख्तसर हिन्दी

· HI
यदि अल्लाह (ऐ रसूल!) आपको किसी विपत्ति से पीड़ित कर दे और आप उसे अपने से दूर करना चाहें, तो पवित्र अल्लाह के सिवा कोई उसे दूर करने वाला नहीं, और यदि वह आपके साथ भलाई का इरादा कर ले, तो कोई उसके अनुग्रह को रोक नहीं सकता। वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, अपने अनुग्रह से सम्मानित करता है। अतः उसे कोई विवश करने वाला नहीं। तथा वह अपने तौबा करने वाले बंदों को बहुत क्षमा करने वाला, उनपर अत्यंत दयावान है।
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